Vinod Gariya
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वंशी नारायण मंदिर, सिर्फ रक्षाबंधन के दिन खुलने वाला रहस्यमयी मंदिर।
देवों की भूमि यानी उत्तराखंड, जहाँ हमें पग-पग पर विभिन्न मंदिरों के....
घी संक्रांति के ख़ास शुभकामना संदेश | Happy Ghee Sankranti Wishes 2026
उत्तराखंड की लोक संस्कृति प्रकृति के साथ सामंजस्य, कृषि पर आधारित जीवनशैली....
घी संक्रांति 2026-इतिहास, परंपराएं, व्यंजन और वैज्ञानिक महत्व।
उत्तराखंड की सांस्कृतिक विरासत में अनेक लोक पर्व अपनी विशेष पहचान रखते....
Harela Wishes 2026, Quotes, Captions in Hindi: जी रया, जागि रया।
उत्तराखंड में हरेला पर्व सावन संक्रांति यानि कर्क संक्रांति को मनाया जाता....
कैंची धाम में मालपुए का प्रसाद क्यों बांटा जाता है? जानिए स्थापना दिवस की यह परंपरा
उत्तराखंड की सुरम्य वादियों में स्थित कैंची धाम आज केवल एक मंदिर....
गंगा दशहरा 2026: पौराणिक श्रद्धा, पर्यावरण चेतना और सांस्कृतिक विरासत का संगम
Ganga Dussehra 2026: भारत की सांस्कृतिक परंपराएं जितनी गूढ़ और प्राचीन हैं,....
Phool Dei: Uttarakhand’s Festival of Flowers Celebrating Spring and New Beginnings
Phool Dei is the traditional festival of flowers celebrated in Uttarakhand to welcome spring and the solar New Year. Children decorate doorsteps with fresh blossoms, sing folk blessings, and receive rice and jaggery, symbolizing prosperity, happiness, and harmony in Kumaoni and Garhwali culture.
कुमाऊंनी होली की अनूठी परम्परायें | Kumaoni Holi 2026
उत्तराखंड की कुमाऊंनी होली अपनी अनूठी परम्पराओं के कारण विश्वभर में प्रसिद्ध है। यहाँ होली का त्योहार सिर्फ रंगों तक ही सीमित नहीं है बल्कि यह लोक गायन, भक्ति, हंसी-ठिठोली और समाज को एक सूत्र में पिरोने वाला उत्सव है। आइये विस्तृत में पढ़ते हैं -
चीर बंधन के बिना अधूरी मानी जाती है कुमाऊंनी खड़ी होली
खड़ी होली की शुरुआत फाल्गुन शुक्ल एकादशी को 'चीर बंधन' (Cheer Bandhan) से होती है। चीर बंधन कुमाऊंनी होली की एक विशिष्ट परम्परा है, जिसके बिना यहाँ खड़ी होली अधूरी मानी जाती है। आईये जानते हैं इस परम्परा के बारे में -
कुमाऊं रेजिमेंट: भारत की सबसे पुरानी और गौरवशाली रेजिमेंट।
कुमाऊं रेजीमेंट, जो अपने निडरता और बहादुरी के लिए प्रसिद्ध है। यह रेजिमेंट भारतीय सेना की सबसे पुरानी और सम्मानित रेजिमेंटों में से एक है। इसके वीर सैनिक देश की रक्षा के लिए अपने प्राणों की आहुति देने में कभी पीछे नहीं हटे।











