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“खतड़ुवा” 2025 : ऋतु परिवर्तन और पशुधन सेवा का त्यौहार।
उत्तराखंड में शुरुआत से ही कृषि और पशुपालन आजीविका का मुख्य श्रोत....
हिलजात्रा 2025 :आस्था के साथ इतिहास, संस्कृति और कला का अद्भुत प्रदर्शन।
पूरे विश्व में मेले और त्यौहार सामाजिक गतिविधियों का एक महत्वपूर्ण अंग....
भारतीय डाक सेवा : – प्रेम-विनिमय का आज भी एक प्रतीक !
अभी अलविदा मत कहो दोस्तो ! क्योंकि‘बीते हुए लम्हों की कसक साथ....
गंगा नदी की पौराणिक कथा | Mythological Story of River Ganga
स्वर्ग में बहने वाली गंगा का अवतरण धरती पर हिंदी माह ज्येष्ठ....
छोलिया-उत्तराखण्ड का पारम्परिक लोकनृत्य।
Choliya Dance Uttarakhand : विभिन्न अंचलों के अपने-अपने लोकनृत्य होते हैं। कुमाऊँ....
Uttarakhand Public Holidays 2023
उत्तराखण्ड सरकार द्वारा वर्ष 2023 के लिए सार्वजनिक अवकाशों की सूची जारी....
घुघुति त्यौहार की लोकगाथा | Ghughutiya Festival Story
घुघुतिया पर्व मनाने की परंपरा चंद राजाओं के शासन काल में शुरू हुई। एक लोकगाथा के मुताबिक राजा कल्याण चंद के पुत्र निर्भय को मां बचपन में घुघुति कहकर पुकारती थी। राजा के मंत्री ने राज्य हड़पने की नीयत से घुघुति का अपहरण कर लिया।
देवीधुरा बग्वाल मेला 2025: इतिहास, पौराणिक कथा और परम्परा।
Devidhura Bagwal Mela : कहा जाता है कि जब पृथ्वी पर मानव....
बागेश्वर का उत्तरायणी मेला-ऐतिहासिक, सांस्कृतिक, व्यापारिक महत्व
बागेश्वर में उत्तरैणी मेले की शुरुवात चंदवंशीय राजाओं के शासनकाल से गयी थी। प्राप्त प्रमाणों के आधार पर माना जाता है कि चंद वंशीय राजाओं के शासन काल में ही माघ मेले की नींव पड़ी। तब पूरे बागेश्वर की भूमि पर उन्हीं का स्वामित्व था। भूमि से उत्पन्न उपज का बड़ा
सुमित्रानंदन पंत की कविता – कुमाऊंनी में।
हिंदी में छायावाद युग के चार प्रमुख स्तम्भों में से एक सुमित्रानंदन....














