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उत्तरायणी मेला 2026 -जहाँ होगा दानपुर, जोहार, काली कुमाऊं, सोर, गंगोली, खरही पट्टियों की संस्कृति का मिलन।
बागेश्वर का उत्तरायणी मेला न केवल धार्मिक और पौराणिक महत्व रखता है, बल्कि यह दानपुर, मिलम-जोहार, काली कुमाऊं, सोर, गंगोली, खरही, अल्मोड़ा आदि पट्टियों की संस्कृति का संगम स्थल भी है। वहीं व्यापारिक दृष्टि से यह मेला बेहद महत्वपूर्ण है।
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बागेश्वर का उत्तरायणी मेला-ऐतिहासिक, सांस्कृतिक, व्यापारिक महत्व
बागेश्वर में उत्तरैणी मेले की शुरुवात चंदवंशीय राजाओं के शासनकाल से गयी थी। प्राप्त प्रमाणों के आधार पर माना जाता है कि चंद वंशीय राजाओं के शासन काल में ही माघ मेले की नींव पड़ी। तब पूरे बागेश्वर की भूमि पर उन्हीं का स्वामित्व था। भूमि से उत्पन्न उपज का बड़ा








