Latest News
Phool Dei: Uttarakhand’s Festival of Flowers Celebrating Spring and New Beginnings
Phool Dei is the traditional festival of flowers celebrated in Uttarakhand to welcome spring and the solar New Year. Children decorate doorsteps with fresh blossoms, sing folk blessings, and receive rice and jaggery, symbolizing prosperity, happiness, and harmony in Kumaoni and Garhwali culture.
कुमाऊंनी होली की अनूठी परम्परायें | Kumaoni Holi 2026
उत्तराखंड की कुमाऊंनी होली अपनी अनूठी परम्पराओं के कारण विश्वभर में प्रसिद्ध है। यहाँ होली का त्योहार सिर्फ रंगों तक ही सीमित नहीं है बल्कि यह लोक गायन, भक्ति, हंसी-ठिठोली और समाज को एक सूत्र में पिरोने वाला उत्सव है। आइये विस्तृत में पढ़ते हैं -
चीर बंधन के बिना अधूरी मानी जाती है कुमाऊंनी खड़ी होली
खड़ी होली की शुरुआत फाल्गुन शुक्ल एकादशी को 'चीर बंधन' (Cheer Bandhan) से होती है। चीर बंधन कुमाऊंनी होली की एक विशिष्ट परम्परा है, जिसके बिना यहाँ खड़ी होली अधूरी मानी जाती है। आईये जानते हैं इस परम्परा के बारे में -
कुमाऊं रेजिमेंट: भारत की सबसे पुरानी और गौरवशाली रेजिमेंट।
कुमाऊं रेजीमेंट, जो अपने निडरता और बहादुरी के लिए प्रसिद्ध है। यह रेजिमेंट भारतीय सेना की सबसे पुरानी और सम्मानित रेजिमेंटों में से एक है। इसके वीर सैनिक देश की रक्षा के लिए अपने प्राणों की आहुति देने में कभी पीछे नहीं हटे।
सिर पंचमी के नाम से प्रसिद्ध है उत्तराखंड में बसंत पंचमी।
उत्तराखंड में बसंत पंचमी का दिन बेहद शुभ माना जाता है। इस तिथि को लोग किसी भी शुभ कार्य को बिना लग्न सुझाये संपन्न करवाते हैं। सिर पंचमी के नाम से पहचाने जाने वाले इस पर्व के दिन यहाँ स्थानीय नदियों को गंगा समान मानकर स्नान करने की परम्परा है।
उत्तरायणी मेला 2026 -जहाँ होगा दानपुर, जोहार, काली कुमाऊं, सोर, गंगोली, खरही पट्टियों की संस्कृति का मिलन।
बागेश्वर का उत्तरायणी मेला न केवल धार्मिक और पौराणिक महत्व रखता है, बल्कि यह दानपुर, मिलम-जोहार, काली कुमाऊं, सोर, गंगोली, खरही, अल्मोड़ा आदि पट्टियों की संस्कृति का संगम स्थल भी है। वहीं व्यापारिक दृष्टि से यह मेला बेहद महत्वपूर्ण है।
Happy New Year 2026 Wishes : प्यार भरे शुभकामना सन्देश।
Happy New Year 2026 Wishes : आप सभी को नए साल 2026....
कुमाऊं से गढ़वाल के घरों तक पहुंची ऐपण कला।
कुमाऊं से ऐपण कला आज गढ़वाल के घरों तक पहुंच गई। आज आपको गढ़वाल के हर मेले, कौथीग में ऐपण उत्पाद दिखाई देंगे।
इगास बग्वाल: उत्तराखंड की ‘बूढ़ी दिवाली’ क्यों और कैसे मनाते हैं | Igas 2025
इगास बग्वाल, जिसे बूढ़ी दिवाली के नाम से भी जाना जाता है। उत्तराखंड, विशेष रूप से गढ़वाल क्षेत्र का एक प्रमुख और अनूठा पारंपरिक त्योहार है। यह पर्व पूरे देश में मनाई जाने वाली दीपावली के ठीक 11 दिन बाद कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को मनाया
UKSSSC पेपर लीक : होंगी जन संवाद बैठकें, SIT से प्रत्यक्ष संवाद कर पाएंगे।
उत्तराखण्ड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (UKSSSC) की स्नातक स्तरीय प्रतियोगिता परीक्षा 2025....









