मांगल गीत ‘दे द्यावा बाबा जी कन्या कु दान’ के बोल। | De Dyawa Baba Ji Kanya Ku Dan.

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कितनी समृद्ध है उत्तराखंड की संस्कृति, बोली-भाषा, इसका अहसास हमें तब होता है जब कोई गैर उत्तराखंडी हमारी संस्कृति, हमारी बोली-भाषा को आत्मासात करता है। यही अहसास हमें एक बार फिर कराया है बिहार की बेटी मैथिली ठाकुर ने। जिन्होंने उत्तराखंड के दोनों अंचलों के मांगलिक गीत गाकर हमें मंत्रमुग्ध किया है। उन्होंने हमारे ही लय, ताल के साथ हमारे मांगलिक गीतों को देश-दुनिया में पहुँचाने का कार्य किया है।

सर्वप्रथम मैथिली ठाकुर ने कुमाऊँ अंचल का लोकप्रिय मांगल गीत ‘सुवा रे सुवा, बनखंडी सुवा। जा सुवा घर-घर न्यूत दी आ‘ गाया। यह गीत विवाहोत्सव निमन्त्रण गीत है, जिसे यहाँ कुमाऊंनी शादी की एक रस्म सुवांल पथाई के समय गाया जाता है। इस बार उन्होंने गढ़वाल अंचल का बेहद लोकप्रिय मांगलिक गीत गाया है। जो कन्यादान के समय गाया जाता है। कन्यादान जैसे भावुक पल को यह गीत और भावुक कर देता है। इस मांगल गीत को सुनकर हर किसी की आँखें नम हो जाती हैं। 

 

गीत के बोल (Lyrics) इस प्रकार हैं – 

दे द्यावा बाबा जी, दे द्यावा बाबा जी कन्या कु दान,
दे द्यावा बाबा जी कन्या कु दान हे।

दे द्यावा बाबा जी, दे द्यावा बाबा जी कन्या कु दान,
दे द्यावा बाबा जी कन्या कु दान हे।

हीरा दान, मोती दान सब को ही देला,
को भग्यान देलो कन्या कु दान हे।

तुम ह्वेला बाबा जी, तुम ह्वेला बाबा जी पुण्य का भागी।
दे द्यावा बाबा जी कन्या को दान हे।
दे द्यावा बाबा जी, दे द्यावा बाबा जी कन्या कु दान,
दे द्यावा बाबा जी कन्या को दान हे।

अन्न दान, धन दान सबको ही देला,
कन्या दान देला भैजी हमारा हे।
तुम ह्वेला भैजी,तुम ह्वेला भैजी पुण्य का भागी,
तुम ह्वेला भौजी पुण्य का भागी हे।

देई दान, भूमि दान सबको ही देला,
कन्या दान देला बौड़ा जी हमारा हे।
तुम ह्वेला बौड़ा जी, तुम ह्वेला बौड़ा जी पुण्य का भागी।
तुम ह्वेला बौड़ी जी पुण्य का भागी हे।

दे द्यावा बाबा जी, दे द्यावा बाबा जी कन्या कु दान,
दे द्यावा बाबा जी कन्या कु दान हे।

 

(हिंदी भावार्थ : हे पिता जी ! आप अब कन्या दान कर दीजिये। कन्या दान कर आप पुण्य के भागी बनेंगे। अन्न दान, धन दान सबको ही देंगे। कन्या दान हमारे बड़े भाई और भाभी देंगे और वे पुण्य अर्जित करेंगे। घर के देहरी से दान और भूमि दान सबको ही देंगे। कन्या का दान हमारे ताऊ और ताई जी करेंगे और पुण्यलाभ अर्जित करेंगे।)

मैथिली ठाकुर के कंठ से सुनिए उत्तराखंड का यह मांगल गीत – 

 

 

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